भारत और सायप्रस ने 2 MoU पर किये हस्ताक्षर

भारत और सायप्रस ने धन शोधन और पर्यावरण क्षेत्र में सहयोग के लिए दो MoU पर हस्ताक्षर किये हैं। इस समझौतों पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनके समकक्ष सायप्रस के राष्ट्रपति निकोस अनास्तासियादेस के बीच वार्ता के बाद हस्ताक्षर किये गये। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद यूरोपीय देशों के साथ भारत के सम्बन्ध बनाये रखने के लिए तीन यूरोपीय देशों की यात्रा पर हैं। सायप्रस के बाद वे बुल्गारिया और चेक गणराज्य की यात्रा पर जायेंगे।

मुख्य बिंदु

धन शोधन का मुकाबला करने के लिए भारत की फाइनेंसियल इंटेलिजेंस यूनिट और सायप्रस की यूनिट फॉर मनी लौंडरिंग के द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। इस समझौते के द्वारा निवेश को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत फ्रेमवर्क को मजबूती मिलेगी।

भारत-सायप्रस सम्बन्ध

सायप्रस भारत में निवेश करने वाला आठवां सबसे बड़ा देश है, भारत में सायप्रस का कुल निवेश लगभग 9 अरब डॉलर है। सायप्रस भारत में फाइनेंसियल लीजिंग, स्टॉक एक्सचेंज, वाहन निर्माण, विनिर्माण, रियल एस्टेट तथा शिपिंग इत्यादि में निवेश करता है। 2016 में दोनों देशों ने दोहरे कराधान परिहार समझौते को संशोधित किया था।

भारत और सायप्रस के बीच कूटनीतिक संबंधों की स्थान 1962 में की गयी थी। भारत ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता के लिए सायप्रस का समर्थन किया था। 2015 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 76.5 मिलियन यूरो था। भारत द्वारा सायप्रस को आर्गेनिक रसायन, वाहन व सहायक उपकरण, लोहा व इस्पात का निर्यात किया जाता है। जबकि भारत सायप्रस से एल्युमीनियम व इसके उत्पाद, लकड़ी की लुगदी, मशीनरी, बोइल्डर, इंजन और प्लास्टिक इत्यादि का आयात करता है।