केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किया मरीज़ के अधिकारों का ड्राफ्ट चार्टर

केन्द्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा तैयार के लिए मरीज़ के अधिकारों के चार्टर को जारी किया। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस चार्टर को राज्य सरकारों के द्वारा लागू करने की योजना बना रहा है। इस चार्टर के द्वारा केंद्र व राज्यों को मरीज़ के अधिकारों की सुरक्षा के लिए ठोस तंत्र स्थापित करने में सहायता मिलेगी।

मरीज़ के अधिकारों का ड्राफ्ट चार्टर

यह चार्टर अन्य अंतर्राष्ट्रीय चार्टरों से प्रभावित होकर बनाया गया है, इसका उद्देश्य भारत में मरीज़ के अधिकारों से सम्बंधित कानूनों को मज़बूत बनाना है। इसमें मरीज़ को आपातकालीन स्वास्थ्य देखभाल का अधिकार, मंज़ूरी, किसी प्रकार के भेदभाव की मनाही, दूसरी राय तथा उपलब्ध होने पर वैकल्पिक उपचार के विकल्प को चुनना इत्यादि शामिल हैं। इसमें 17 अधिकार शामिल किये गए हैं।

आवश्यकता

भारत में मरीज़ के अधिकारों के सम्बन्ध में सभी राज्यों में एक जैसे नियम नहीं हैं। कुछ एक राज्यों ने नेशनल क्लिनिकल एस्टाब्लिश्मेंट एक्ट, 2010 को स्वीकार किया है जबकि अन्य राज्यों ने स्वयं के राज्य स्तरीय नियमों का निर्माण किया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में बिना किसी भेदभाव के सभी मरीजों का उपचार किया जाना आवश्यक है, मरीजों के साथ किसी बीमारी अथवा स्वास्थ्य स्थिति जैसे HIV स्टेटस, जाति व धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।